बच्चों में पाए जाने वाले दिल के रोग और उनका इलाज

डाॅ केके अग्रवाल*

भारत दिल के रोगों में दुनिया की राजधानी बनने के करीब पहुंच चुका है। 21वीं सदी की जीवनशैली की अनियमितताएं और तनाव से 30 साल की उम्र तक के लोगों में दिल के रोग आम हो रहे है। लेकिन छोटे बच्चों में भी दिल के रोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जन्मजात दिल के रोग आम तौर पर पाए जाते हैं। बच्चों मे दिल के रोग जन्मजात भी हो सकते हैं और बाद में भी हो सकते हैं।



Heart Problems in Children
Heart Problems in Children

जन्मजात दिल के रोग

देश मे 125 में से एक यानि 1 प्रतिशत बच्चे जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित होते हैं जिन्हें 'ब्लू बेबीज़' कहा जाता है। एक समय था जब इसका कोई इलाज नहीं था और डाॅक्टर उसे बच्चे की किस्मत कह कर पेरेंट्स को जानकारी देते थे। लेकिन पिछले कुछ दशकों में मेडिकल क्षेत्र में हुए विकास के मद्देनज़र सर्जरी के बाद जन्मजात दिल के रोग वाले बच्चे भी आम बच्चों की तरह ज़िंदगी गुज़ार सकते हैं।



जन्मजात दिल के रोग नवजात बच्चे में दिल के ढांचे और बड़ी रक्त वाहिनी में आकार की ख़ामी की वजह से हो सकते हैं। जन्मजात दिल के रोगों का 80 प्रतिशत हिस्सा आठ किस्म की खामियां होती हैं और बाकी 20 प्रतिशत मामलों में कभी-कभार पाई जाने वाली या कई खामियों का संयोग होता है। 

दिल के जन्मजात रोग बच्चों में नज़रअंदाज़ हो सकते हैं क्योंकि कई बार इनके लक्ष्ण नज़र नहीं आते। ऐसे मामलों में यह बच्चों के विषेशज्ञ द्वारा बच्चे की आम जांच के दौरान ही सामने आते हैं। पेरेंट्स को निम्नलिखित चिन्हों का ध्यान रखना चाहिए जो पहले से मौजूद दिल की समस्या का संकेत दे सकते हैं-
-दूध पीने में दिक्कत
-अत्यधिक पसीना आना
-सांस लेने में तकलीफ होना
-होठों, उंगलियों और पैर के अंगूठों का नीला होना
-बच्चे का संतुलित विकास ना होना
-बच्चे की छाती में बार-बार संक्रमण होना

दिल की जन्मजात समस्या दिल की वाॅल्व में खराबी, दाएं और बाएं दिल के मध्य वाली दीवार जिसे सेप्ट्म कहा जाता है उसमें खराबी, दिल के दाएं या बाएं हिस्से में छेद या गलियारा होना और कुछ रक्त नलिकाओं का आपस सें संपर्क असंतुलित होना आदि तरीकों से उजागर हो सकती हैं। 



रियोमेटिक हार्ट डिसीज़ या बाद में होने वाली दिल की बीमारियां

रियोमेटिक हार्ट डिसीज़ आम तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों में पाई जाती है और गले के स्टरेप संक्रमण से होती है, जिसकी वजह स्टेपटोकोक्स नामक बैक्टीरीया होता है। 

स्टेपटोकोक्स बैक्टीरीया की जेनेटिक संरचना दिल की मांसपेशियों जैसी होती है, इसलिए शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली बैक्टीरीया और दिल की मांसपेशी में फर्क नहीं कर पाती, जबकि दिल पर बुरा प्रभाव डालती है। यह विषेशकर दिल की नलिकाओं और मांसपेशियों पर प्रभाव डाल सकता है इनकी कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।

भारत में रियोमेटिक बुख़ार स्थानीय स्तर पर फैलता है और दिल के रोगों का बड़ा कारण बनता है। बाद में होने वाले दिल के 25 से 45 प्रतिषत रोग इसी की वजह से होते हैं। हर साल विकसित देशाें की तुलना में हमारे देश में 100 से 200 गुना ज़्यादा मामले रियोमेटिक बुख़ार के सामने आते हैं और प्रति एक लाख स्कूल जाने वाले 5 से 17-18 साल तक के बच्चों में इससे प्रभावित होने वालों की संख्या 100 से 200 तक होती है।

बच्चों पर इस बीमारी के पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए पेरेंट्स को बच्चों में कभी खांसी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, जिनमें बुख़ार हो लेकिन छींके ना आ रही हों। इसके प्रमुख लक्ष्णों में जोड़ों में जलन और सूजन, दर्द और कई जोड़ों पर लाली आना, छोटी-छोटी गांठें होना या सख़्त हो जाना, चमड़ी के गिर्द गोल उभार होना, बच्चे में न्यूरोमस्कुलर बदलाव होना, शरीर पर फुन्सी होना, बुख़ार, वज़न में असामान्य गिरावट, थकान और पेट में अक्सर दर्द होना आदि शामिल हो सकते हैं। यह सभी लक्ष्ण वायरल बुख़ार के भी हो सकते हैं, लेकिन डाॅक्टर से सलाह लेकर इस बात को निश्चित करना ज़रूरी होता है कि बच्चे को स्टरेप थ्रोट इंफैक्शन और रियोमेटिक हार्ट डिसीज़ तो नहीं है। 

पीड़ित बच्चे का वाल्व बदलना पड़ता है अगर सही समय पर ना किया जाए तो जान भी जा सकती है।
देश के बहुत सारे बच्चे जन्मजात और आमवात दिल के रोगों से सिर्फ इसलिए मौत के मुंह में चले जाते हैं क्योंकि यहां पर उन्हें इलाज की सुविधाएं नहीं मिलती ख़ास कर जटिल जन्मजात दिल के रोगों के लिए इलाज नहीं मिल पाता। इसके साथ ही महंगी सर्जरी का खर्च ना उठा पाने के कारण पेरेंट्स बीमारी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और इसे बच्चे की किस्मत मान लेते हैं। बहुत से लोगों को नहीं पता हर मुश्किल के रास्ते निकाले जा सकते हैं और मदद ली जा सकती है।

ऐसे बच्चों के लिए निम्नलिखित विकल्प मौजूद हैं-


  • समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड, हार्ट केयर फाउंडेशन की पहल है जो ज़रूरतमंद बच्चों को दिल के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इसके हेल्पलाईन नम्बर 9958771177 पर सोमवार से शनिवार फोन करके कोई भी इस मदद के लिए आवेदन कर सकता है। 
  • देश के कई हिस्सों में रोटरी क्लब बच्चों के दिल के रोगों का इलाज मुफ्त में करवाते हैं।
  • सलमान ख़ान द्वारा चलाई जा रही संस्था बींग हयूमन जन्मजात दिल के रोगों के लिए बच्चों की आर्थिक सहायता करती है।
  • लगभग सभी प्रदेश गरीबी रेखा या इसके सामान कार्डधारको को जन्मजात दिल के रोगों के लिए एक लाख रूपए तक की सहायता प्रदान करते हैं।
  • दिल्ली प्रदेश सरकार भी उन बच्चों को आर्थिक सहायता देती है जिनके पेरेंट्स की आमदन तीन लाख सालाना से कम है।
  • पेरेंट्स कानूनी सलाहकार की मदद से नगर निगम में इस मदद के लिए आवेदन कर सकते है, और विधायक या सांसद के ज़रिए प्रधान मंत्री राहत फंड से भी मदद ले सकते हैं।
  • बेंगलूर स्थित पूत्तापारथी हार्ट सेंटर भी ऐसे बच्चों की मु फत सर्जरी करता है।
  • महेश्वरी क्लब, महेश्वरी परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा देता है,  ऐसी और भी कई संस्थाएं हैं जो सेवा प्रदान करती हैं।
  • लोग अपने धार्मिक संस्थाओं गुरूद्वारों, मस्जिदों और हिंदू महासभा से भी मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं।
  • आर्टिकल 21 के तहत नागरिक अपने प्रदेश सरकार से मुफ्त सर्जरी की सुविधा प्राप्त करने के लिए हाई कोर्ट जा सकता है।
  • प्रदेशों में स्थित सरकारी हस्पताल भी कई तरह की मुफ्त सर्जरियां करते हैं, जैसे दिल्ली का जीबी पंत हस्पताल सभी की दिल की सर्जरी मुफ्त करता है।
  • सफदरजंग हस्पताल दिल के रोगों के पूरे देश के मरीज़ों की मुफ्त सर्जरी करता है। 
  • लोग पीएसयूज़ से उनकी सीएसआर पाॅलिसी के तहत भी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।
  • लोग बड़ी प्राईवेट कंपनियों से भी उनकी सीएसआर पाॅलिसी के तहत सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।
हम बस यह चाहते हैं कि सिर्फ आर्थिक तंगी की वजह से देश में कोई भी बच्चा केवल इलाज की वजह से ठीक होने वाली बीमारी से मौत के मुंह में ना चला जाए।

*लेखक दिल के रोगों के जानेमाने विशेषज्ञ, हार्ट केयर फाउंडेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के  आॅनरेरी सेक्रेटरी जनरल हैं।



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